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Sunday, 26 April 2020

ଘନଶ୍ୟାମ

ବିହାୟସେ ଦେଖି ବାହିତ ନୀରଦ
        ଚିତ୍ତ ବୃନ୍ଦାବନେ ଭାବନା ଆସେ
ଶ୍ୟାମ ଘନ ନୁହେଁ ମୋ ଦୃଷ୍ଟି ପଥରେ 
       ଘନଶ୍ୟାମ ଶ୍ୟାମ ଶ୍ରୀଅଙ୍ଗ କି ସେ । 

ଇନ୍ଦ୍ରଧନୁ ଉଇଁ ସେ କୃଷ୍ଣ ଘନରେ
          ସତେ କି ଶିଖୀ ଚନ୍ଦ୍ରିକା  ପ୍ରକାଶେ 
ଚଞ୍ଚଳା ଝଟକ ନୀଳ କଳେବରେ 
            ପଟ୍ଟ ପୀତାମ୍ବରୀ ସଦୃଶ ଦିଶେ । 

ଧରିତ୍ରୀ ତାପକୁ ହୀନ କରିବାକୁ 
         ଝରିଲାଣି ଝର ଝର ହୋଇ ସେ  
ମୋ ଚିତ୍ତ ଚାତକ ତୋ କୃପା ବାରିକୁ 
        ଅପେକ୍ଷା କରୁଛି ପ୍ରଭୁତ  ଆଶେ। 

ଆସ ଅବତରି ମୋ ହୃଦ ଧରାକୁ
           ଆର୍ଦ୍ର କରି ତାକୁ ଭକତି ରସେ
ବହି ଚାଲୁ ମୋର ଏ ଦୁଇ ନୟନ
   ଶ୍ରାବଣେ ଧାରା ଯେପରି ବରଷେ । 

ବିହାୟସେ-- ଆକାଶରେ 
ଶ୍ୟାମ ଘନ --- କଳା ମେଘ
ଘନଶ୍ୟାମ ଶ୍ୟାମ ଶ୍ରୀଅଙ୍ଗ.... ଶ୍ରୀ କୃଷ୍ଣଙ୍କର କୃଷ୍ଣ ଦେହ 

Tuesday, 5 November 2019

सिर्फ तुम मुरलीधर


मुझ पर, मेरे तन, मन,प्रीत पर,
अब हक़ हासिल रखते हो सिर्फ तुम मुरलीधर ,
और कोई नहीं है यहाँ, कण भर,
ना है कोई, ना ठहर सकता है यहाँ क्षण भर।  

कर्म, विश्राम, शयन, जागरण,
चेतन, चिंतन, अवचेतन मन,
हर ओर तेरे ओज की है भरमार,
अद्भुत, अतुलनीय, श्याममय, सुंदर।  

फ़िर चाहे, ये, वो या कोई और,
आ जाएँ  मेरे सामने बार-बार,
न है, न रहेगा कोई असरदार,
क्योंकि तुम हो यहाँ, प्रबल हर ओर। 

Monday, 7 October 2019

चरण कमल बन्दे जगज्जननी

चरण कमल बन्दे जगज्जननी,
स्नेहा, स्निग्धा, शान्तिप्रदायिनी,
महिषमर्दिनी जग सुःखदायिनी,
देवगण पूजिता दिव्यशक्तिधारिणी,
चरण कमल बन्दे जगज्जननी।  

चारु कांति कैलाशविहारिणी,
शर्वाणी, भवानी भवदुःखहरिणी,
नमामि तें माते विद्यास्वरूपिणी,
शरणे सुरक्षा संतोषदायिनी,
चरण कमल बन्दे जगज्जननी। 

तब चरणे मम आनंद महेश्वरी,
मम  स्वर्ग, मम  प्राण ते भुवनेश्वरी, 
देहिमे  देहिमे  श्रद्धा मातेश्वरी,
भो जगन्माते दुर्गे  सिंहवाहिनी,
चरण कमल बन्दे जगज्जननी।  


एक पुत्र के लिए माता की चरण ही सब कुछ।   

Sunday, 28 July 2019

मेरी बात और है,

ज़रूरत  भर की दोस्ती,
मुझको  को  न आया। 
मतलब  की रिस्तेदारी,
मुझको  न भाया। 

मैं  तो साफ़ था  दिल से,
सो सब साफ़ कह दिआ,
फ़िर  कोई कुछ भी सोचें,
मुझे   कुछ आया न गया। 

मैंने तो दे दिआ  उन्हें वो,
जो कभी अपना हुआ करता  था,
फिर ये न देखा पलट कर,
सब कुछ खो कर मैंने  क्या पाया। 

तुम्हें  मुबारक़, हे अजीज़ मेरी,
तुमने सबकुछ पा लिया,
मेरी बात और है,
मैंने तो मुहब्बत की है।    
  

Tuesday, 16 April 2019

बिभाजनकारी

जीत जाओ तुम चुनाव चाहे,
नफ़रत  की बात तो मत करो,
बलि न दो देश की चैन-ओ अमन की,
हिन्दू- मुसलिम त न करो।

सदिओं से हम इस मिटटी पर,
एक साथ रहते आए हैं,
हर खुशी और गम को हम लोग,
आपस में बांटते आए हैं।

बित जाएगी चुनाव की मौसम,
ये गढ़ा तो न पट पाएगा,
गुजर तो जाओगे तुम सारे नेता,
एक कील कहीं रह जाएगा।

संभल जाओ ओ देश की प्रेमी,
 रहो तुम इस ज़हर से दूर,
 करो वही  जो तेरे विचार से,
देश की हित को हो मंजूर।

भोट  तुम्हारी है किसीको भी तुम दो,
देश की हित  का रखो ख़याल,
बिभाजनकारी सारे ताकतों से,
बचाकर रखो इसकी मुस्तक़बिल।   

नोट-----कुछ  पार्टी आज मुस्लमान भाईओं को एक हो कर मोदीजी के ख़िलाप  भोट देने की खुली अपील कर  रहे हैं।
1 क्या यह साम्प्रदायिकता नहीं ?
2. क्या यह भोट की ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं ?
3. क्या यह देश को हिन्दू-मुसलिम में बाँटने की प्रयास नहीं ?
4.  क्या एक आम चुनाव में हार-जीत देश की अखंडता से बढ़  कर  है ?
5 . उनके इस प्रकार के मुसलमन भाईओं को अपील करने से यदि कोई हिन्दू भाईओं  एकजुट हो कर मोदीजी को भोट  करने को अपील करता है, तो क्या वह "असहिष्णुता" या साम्प्रदायिकता कहलाएगा?
देश की समस्त जाति, धर्म और प्रान्त की  लोगों से गुजारिश है जो भी करो, देश, उसकी अखंडता और प्रगति के हक़ में  करो। भोट किसी को  भी दो, देश बिरोधी बातों को नजरअंदाज करो। यारी और प्यार बने रहे। 

Saturday, 13 April 2019

तुम एक बादल, मैं एक बूँद हूँ,


तुम एक बादल,  मैं एक बूँद हूँ,
आज तुमसे अलग थलग हूँ, 
तुम मुझतक तो हो,पर मैं तुझतक नहीं हूँ ।   

जब से तुमसे अलग  हुआ हूँ 
संसार की धुआं-धूल में सना हुआ हूँ,
बेचैन हूँ, बेहाल हूँ, बेदम हूँ। 
  
पड़ा हूँ लहूलूहान इस जमीन पर ,
उठा लो,सँभाल लो,सँवार लो मुझे,
क्यूंकि  मैं तन-मन से तेरा ही तो हूँ। 

मैं इस प्रदूषण  से मुक्त रहना चाहता हूँ 
तेरी तरह स्वच्छ बनजाना  चाहता हूँ,
तुझ तक पहुँच जाना चाहता  हूँ।  

यह सच है की आज मैं तेरी तरह नहीं हूँ, 
पर तेरी कृपा हो तो तेरे योग्य बन सकता  हूँ,
मैं तुझसे हूँ , तुझमें समाजाना चाहता हूँ। 

मेरा अस्तित्व कल तुझमें था, 
आज तेरे कारन है, पर तुझसे भिन्न है,
इतनी मिन्नत है कल तुझमें ही रहे। 


 

Friday, 12 April 2019

इनकी राजनिती

हम  आपको मुफ़्त में  पैसा देंगे,
एक रूपया में चावल देंगे,
हम को  सत्ता में  आना जो है।
फ़िर  चाहे जनता मुफ़्तखोर  बन जाए,
चहे तो खेत में अनाज़  न  उपजाएँ ,
हम को  सत्ता में  आना जो है।

हम किसानों की कर्जा माफ़ कर देंगे,
फ़र्जी  लाभार्थिओं को जाँच  नहीं करेंगे,
हम को  सत्ता में  आना जो है।
चाहे राजकोष   को कुछ भी  नुकसान हो,
देश  प्रगति के लिए पैसा बचते  हो या न हो,
हम को  सत्ता में  आना जो है।

हम तुष्टिकरण  की राजनिती  करेंगे,
हम  भाई को भाई से लड़वाएंगे,
हम को  सत्ता में  आना जो है।
फिर चाहे अविश्वास  का  माहौल बन जाएं,
देश भर में  नफरत की आग लग जाएं,
हम को  सत्ता में  आना जो है।

 कुछ  दल देश को अपाहिज़  बनाकर(७२०० रूपया सालाना रिश्वत  दे कर ), आवाम को मुफ़्तखोर  बना कर,   तुष्टिकरण  और भोट की ध्रुवीकरण की राजनिती  कर कर  सत्ता हथियाना चाहते  हैं। देश को  अंतराष्ट्रीय स्तर  में पहचान देना, विकशित देश की कतार  में ले जाना, भ्रष्टाचार से निपटना  उनकी सोच से बहार है। उच्च शिक्षा   को  देश की जन, जन तक पहुंचे, हमारे  बौद्धिक विकास हो  ये  उनकी एजेंडा नहीं है।  ये चाहते हैं की देश की गरीव जनता दो वक्त खा पि कर पड़े रहें , काम न करें, बच्चों को  न पढ़ाएं और हम क्या कर रहें हैं न पूछें। फिर चाहे देश कभी विकसित देश न कहलाए, हम  आए दिन आतंकवाद का शिकार हो, सत्ता हमको मिलना चाहिए।    

Sunday, 24 March 2019

असाधु गठजोड़

यह  देखो लुटेरे कर लिए  हैं जोट,
बटोरने चले हैं बेईमानी से वोट,
व्यक्ति ईमानदार को हराने कि  खातिर,
देश के  चौकीदार को  घेर लिए हैं  शातिर ।

चरित्र कुछ नहीं है इस असाधु मेल का,
वजूद बचाना है मक़सद उनके खेल का,
मांगते हैं वोट देखो जाति, धर्म  के नाम पर
देश की अखंडता का नहीं है उनको फ़िकर।

यह बुखार उनको तब से चढ़ा है,
जब से आधारकार्ड बैंक खाते से जुड़ा है
जब से विमुद्रीकरण का डंडा उनपर पड़ा है,
सुख चैन घोटालेबाजों का तभी से  उडा  है।

जब से   मोदीजी किए हैं सर्जिकल स्ट्राइक,
आतंकी  ठिकानों पर हुआ है एयर स्ट्राइक,
तब से जातीयता की  लहर से घबराए हुए  हैं,
सारे छद्म सेकुलर एक मंच पर आए हुए हैं। 

उनके डर की एक और  है माकूल कारण,
मोदीजी तो दरवेश है न जऱ है  न जमीन, 
कहीं  बेनामी सम्पतिओं की  कर न लें छानबीन,
फिर तो महल के आदी  हो जाएंगे  वस्त्रहीन। 

अब  यह चुनाव में  उनका बस एक ही मुद्दा है
मोदीजी को हर हाल में हराना उनका एकल मसौदा है,
अपने राजनीति  की दुकान को चलाते जाना जो है
लूटे धन को कानून की जकड़ से  बचाना जो है।  

एक तरफ जाति और तुष्टिकरण की राजनीति ,
दूसरे ओर देश की अखंडता, अस्मिता  और प्रगति 
हारेंगे मोदीजी तो हारेगा देशप्रेम, हारेगी  ईमानदारी,
लूटेगा देश और खुश होंगे  तमाम  भ्रष्टाचारी। 

नोट -- लोग सोचते होंगे कि यह सब मैं मोदीजी के लिए लिख रहा हूँ ,यह गलत है। देश की चिरंतनता में व्यक्ति  या दल परिवर्तनशील घटनाक्रम से ज्यादा कुछ  भी नहीं है ।  एक लेखक को चाहिए की वह तटस्थ होकर अपना  ज्ञान सम्मत मत दे ,मुद्दे के आधार पर जो भी देशहित में हो वही  लिखे। मैं और  मेरा व्यक्तिगत नफ़ा-नुकसान, राजनैतिक पसंद-नापसंद(पक्षपात) देशहित की विवेचना करते समय आड़े नहीं आता है। यही दल, यही व्यक्ति अगर विपक्षिओं की तरह देश को जाति की आधार पर बांटे, या तुष्टिकरण की राजनीति करें तो मेरी  कलम उनके ख़िलाफ़ भी  मुख़र होने से पीछे  नहीं हटेगा। जय हिन्द। जय श्रीकृष्ण। 

Friday, 15 March 2019

फ़ौज़ का मनोवल

देश है धरती पर एक भाग्य से बंधा,
प्रेम प्रीति  से बसा सुंदर  परिवार,
फ़ौज़  है उसको सदा सुरक्षा देता,
विश्वस्त सबल दर-ओ-दीवार। 

देश की रगों में  बहता निरंतर,
 फ़ौज़ है  बहुमूल्य रक्त समान,
जिसके  शौर्य और सामर्थ पर निर्भर 
देश की अस्मिता, देश की जान। 

तुम घर के अंदर जिस तरह भी रहो,
न दो उस दीवार को कोई नुकसान,
न घोलो उस खून में अविश्वास का ज़हर,
कमज़ोर  न  करो  फौजी  का  मन।  

जब कभी गिरता  हैं उसका  मनोबल,
तो जमीन पर आ जाती  देश की शान,
तब  दुश्मन चाहे कितना भी छोटा हो,
हो जाता है उसका काम आसान।     

Note...India का  airstrike के  बाद  कुछ दल अपने तुच्छ राजनैतिक  आकांक्ष्याओं  के लिए  भारतीय सेना को गलत और दुश्मन के  प्रचार को सही बोल रहे थे। यह अपने ही सेना के शौर्य और पराक्रम को कम कर के उसका मनोबल को गिरानेवाली बात  है। जय भारत, जय जवान। 

Wednesday, 13 March 2019

गद्दारों की टोली में,

गद्दारों की टोली में,
 मची हुई खलबली,
मोदीजी ने कर दिखाया,
काम 56  सिना वाली।

एयर-स्ट्राइक से दुःखी है गद्दार,
 गदगद है सारा हिंदुस्तान,
समझ रही  है जनता सब कुछ,
किसकी पीडा से कौन है परेशान।

मांगते हैं गद्दार सेना से सबूत,
 कुछ तसवीर तो  जरूर लाना था,
मिराज  जहाज के पीछे बांधकर,
दो-चार को पाकिस्तान  ले जाना था।

पकिस्तानपरस्त इन  नेताओं  को,
 सिर्फ़ एक आम चुनाव की  पड़ी है,
जब कि दहशतगर्दी  देश के सामने
एक भयानक ख़तरे  रूप में खड़ी है।

अभी  होगा और सर्जिकल-स्ट्राइक ,
देश लेगा और  इन्तक़ाम,
पर इसबार इंटरनल-सर्जिकल-स्ट्राइक  में,
होना  है गद्दारों का काम तमाम।

मोदीजी, आप आगे बढ़ते रहो,
देश की अस्मिता की खातिर
इलाज़ करो अपने निडर अंदाज़  से
कुछ  लोगों की सोच  है  बड़ी  बीमार।

देश रहेगा तो कई और चुनाव होंगे ,
जीतेगा  कोई  या  फिर हारेगा कोई
देश के  अस्तित्व और अस्मिता  के आगे,
 हार-जीत, कुछ भी कोई भी  बड़ा तो नहीं।

       

Saturday, 9 March 2019

दहशतगर्दी की कब्र।


बहुत  करलिया  तू  मनमानी,
बहुत हो चुका हमारा  सब्र,
अब तो खोदेगी भारत की सरकार,
हर हाल में  दहशतगर्दी  की  कब्र।

ये वो दल  नहीं जो सदा करता  फिरे
वोट बैंक की भद्दी राजनीति,
बिगाड़कर देश का  मुस्तकबिल ,
बनजाए  गद्दी की  ख़ातिर  पक्षपाती।

सत्ता सुख के भुक्खड़ थे सारे,
देशहित से उनको न था सरोकार 
धन कमाने को फिकरमंद  थे  वो,
देश ओ जनता के  थे  वो गद्दार।  

वर्ना पहले भी तो थी हमारे देश की 
वही सैन्य-शक्ति की तलवार,
पहले भी थी हममें उतनी क्षमता,
उस  तलवार में वही धार। 

पर न था  हमारे देश के पास ,
आजसा  ताकतवर नेता, देशप्रेमी सरकार 
और न थी  उनमें वो इच्छाशक्ति,
कि  करता कोई  निर्णायक वार।

वक़्त की नज़ाकत  को समझो,
तो  बंद कर दो धर्मान्धता  का कारोबार 
वर्ना  लोग कहेंगे "एक था  फलां मुल्क,
देखो  वहां  अब है उसका खंडहर।"    


नोट--- जब  कोई  दल सत्ता की खातिर आतंकवाद का  विरोध न करते हुए यह मान लेता हो की उसे मुसलमान  का वोट मिल जायेगा तो वो हमारे सारे मुसलमान  भाईओं को आतंकवाद के  हमदर्दों में गिन लेता है, यह हमारे मुसलमान  भाईओं के देशप्रेम पर संदेह और उनका अपमान है ।  जब कि  ये  देश बहादुर शाह जफ़र, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसा अनेक वीरों की देश भक्ति का  ऋणी है। ए.पी.जे.अब्दुल कलाम, जिनका नाम लेने से हमारे सिर सम्मान से झुक जाते  हैं  , क्या ये देश के इस सपूत का अपमान नहीं?  
मुस्लमान  वो गुल  है जो  इस गुलिस्तां का एक अभिन्न और विश्वस्त हिस्सा है। उसे वोट का टुकड़ा न समझो, वो इस मिटटी की  एक खुशबू है।   


Sunday, 3 March 2019

हिंदुस्तानी शेर

"वक्त बदला है सोच बदली है,
नया नेता है, नई  सरकार,
देशप्रेमी के  सख्त  हाथों में
देश की अस्मिता की है वागडोर।"

दहाड़ है यह हिंदुस्तानी शेर की,
दुश्मन हो जाओ होशियार,
बाज आओ अपनी नापाक हरक़तों से,
तेरे  खात्मे  को है वह तैयार।

जोशोखरोश से भरा है सीना,
देशभक्ति उसमें है अपार,
शौर्य , सामर्थ्य में अतुलनीय वो,
डरना सीखा नहीं है यह शेर।

बहते खून पर आंसू  न बहाता,
निकाल लेता है वह तलवार,
चैन से  नहीं बैठा रहता है वह,
जबतक हिसाब न करले बराबर।

तेरी  हर  गुस्ताख़ी  को  सहता जाए,
बुज़दिल नहीं  है मेरे  सरकार,
समझलो, संभलजाओ या फिर मिट जाओ,
चुन लो वो पथ जो भी हों  तेरे विचार।


  

Tuesday, 12 February 2019

माँ सरस्वती

नमस्ते माँ  सरस्वती विद्या प्रदायिनी,
वाकदेवी, वर्णेश्वरी माँ वरदा,  ब्रह्माणी।

त्रिदेवी मध्ये श्रेष्ठा माँ   कल्याणकारिणी,
ब्रह्मलोक  निवासिनी माँ  वीणावादिनी। 

ज्ञान, बुद्धि, कला, सुर की कृपाकारिणी,
पुस्तकहस्ता  माँ कविजिह्वाग्रवासिनी। 

चन्द्रोज्वल दुग्धफेनिल  शुभ्रा वस्त्र धारिणी,
कमल सुमन आसीना माँ  वरदायिनी।  

चौहस्ता, सौम्यदर्शना हे  मृदु भाषिनी,
विराजिए मेरे मन में, मेरी स्नेहमयी जननी।  

दिव्य शुक्ल प्रभा उद्भासितांग  स्मितहासिनी, 
विभुभाव  कृपा  करो माँ  मरालवाहिनी। 








Thursday, 31 January 2019

गंगा माँ


उनके लिए गंगा माँ ,
तुम सिर्फ़ एक वहता पानी,
हिमालय  से निकलती ,
कल कल करती ,
सागर की ओर भागती  
वहता पानी।

मग़र मेरे लिए माँ,
तुम  एक महीयसी जननी,
जनक हिमाला  से आँचल छुड़ाती 
जीव, जहाँ को भिगोती,  सींचती ,
पहाड़ पठार से  लढ़ती,  जीतती 
समतल भूमि पर अमृत उढ़ेलती 
संतानों के हित को  सवांरती 
कल्याणकारिणी ममतामयी जननी,
आदर, सम्मान और पूजा की  अधिकारिणी।

  

Sunday, 20 January 2019

शोहरत

अगर,
 शोहरत की दुनिया में,
 बेआबरू हो कर ही जाना होता है,
तो,
 हम गुमनाम ही अच्छे हैं। 

If one can reach the world of fame,
Only when one goes naked,
Then,
I am comfortable,
Nameless.

Tuesday, 8 January 2019

देव ऋण

उस अदृश्य डोर का क्या कहना,
जिससे बंधा है सारा संसार,
सारे विद्यमान दृष्ट ओ अदृष्ट,
तेरी शक्ति और तेरा प्यार। 

तेरी इच्छाओं से आत जात है,
घटनाएं, प्राणी यंत्र प्रकार,
मानव जीवन, संलग्न सुख,
सर्वस्व है तेरा महा उपकार। 

कैसे चुकाऊँ यह ऋण हे देव,
क्या लिए जाऊं तेरे द्वार,
जो  देखूँ या सोचूं सकल तेरा है,
देता हूँ  तुझे मैं अपना प्यार। 

Monday, 7 January 2019

हरि हे, तुम मालिक मैं दास।

हरि हे, तुम मालिक मैं दास,
भव  भँवर में असहाय पड़ा हूँ,
हाथ फैलाए सामने खड़ा हूँ,
कर के तेरी कृपा पर आस,
हरि हे, तुम मालिक मैं दास। 

जिसको मिला हो तेरा आसरा,
जिसके मन में हो तेरा बसेरा,
आश्वस्त चितवन, स्थित संतोष,
भव पीड़ा तुच्छ उसके पास, 
हरि हे, तुम मालिक मैं दास। 

जड़ बुद्धि हूँ , राह न पाऊँ,
माया की जाल में उलझता जाऊँ,
ऐसे में तुमपर स्थिर विश्वास,
करलो मुझपर कृपा मेरे ईश,
हरि हे, तुम मालिक मैं दास। 

Sunday, 6 January 2019

अथः पागल उबाच

एक डाल से दूसरी डाल,
उड़ता पंछी प्रकार,
एक देह से दूसरे देह का,
आत्मा करती  सफ़र।

बद्ध बुद्धि से सोचती आत्मा,
सबकुछ है यह शरीर,
भ्रम में पड़कर करती रहती,
मात्र देह की फ़िकर।

संसार कर्मों को, तद्भव सुखों को,
चलती लख्य बनाकर,
घबरा जाता चलते चलते,
अंत समय देखकर।

आत्मस्थ होकर आसरा ढूंढ़ता,
मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वार,
भय में आकर सर झुकाती,
हर भ्रमात्मक ठौर।

ज्ञानांध मानव दम तोड़ता,
अंधकार पथ पर,
भटकी हुई आत्मा सुरु करती,
एक और अंधी सफ़र।

जब तक प्राणी नहीं चलता ,
दिव्यज्ञान के पथ पर,
पुनरपि जनमं, पुनरपि मरनं,
होता भव भूमि पर।

Friday, 4 January 2019

तत्प्रीत्यार्थम

हे बैकुण्ठवासी, देव अविनाशी,
तुमको  है नमन, तुमको  मेरा प्यार। 

तुम  मेरे मीत,तुम ही मेरी प्रीत,
मेरा सर्वस्व तुम हो, हे नाथ नटवर। 

तुम मेरी भक्ति, तुम हो मेरी शक्ति,
मेरे लिए तुम ही हो सारा संसार।

यह जगत क्या है, तेरा बसाया है,
तुम इसके मालिक, तुम पालनहार। 

मेरा जीवन कैसा है, तेरा तराशा है,
इस अकिंचन आत्मा पर है तेरा उपकार। 

जब तक मैं जीऊँ, धरती  पर रहूँ,
मेरी साँस रहेगी तेरा कर्जदार। 

बस एक ही ईच्छा, मैं लिखता रहूँ ,
तत्प्रीत्यार्थम, हे मेरे प्राण के आधार।  

Saturday, 17 November 2018

श्री राधा शरणं


जा के सुमिरत अनवरत मोर आराध्य नंदकुमार,
सो श्रीराधा चरण शरण मोर मन होए अधीर |

जे नित गोविंद मन गत परम अमित प्रेममयी अविनाशी,
सो श्रीराधा बंदे प्रदीप्त भवसागर पार अभिलाषी |

अलौकिक असोच्य शाश्वत कृष्ण साथी,
बंदे श्रीराधा अद्वितीय आदर्श  प्रेममूर्ती |

वृंदावनविहारिणी , कमलिनी कृष्ण हृदयसंगिनी,
असीम भक्ति सागर कृपा कीजै श्रीराधारानी |

ଆଜି ପରା ରଥ ଯାତ

https://youtu.be/38dYVTrV964 ଆଜି ପରା ରଥ ଯାତ, ଲୋ ସଙ୍ଗିନୀ ଆଜି ପରା ରଥ ଯାତ  ବଡ ଦାଣ୍ଡ ଆଜି ଦିବ୍ୟ ବୈକୁଣ୍ଠ ଲୋ  ରଥେ ବିଜେ ଜଗନ୍ନାଥ।  ଏ ଲୀଳାକୁ ଦ...